4 POINT PROGRAM

Mr. K. G. Balakrishnan, Hon’ble former Chief Justice of India & Chairperson, NHRC

Dr. John Dayal, Secretary General of the All India Christian Council & All India Catholic Union

Mr. Asif

Dr. S. Farooq, Director, Himalaya Drugs

Mr. Ashok Kumar, President of All India Dalit Confederation

Mr. Firoz Bhakt, Chancellor

Mr.Prashant Kishore, Political Strategist

Mr. Mesh Ram-President of BAMSEF

Mr. Amir Rashadi Madani-President of All India Qaumi Council

Mr. Shaikh Salman, President of New Jersey Chapter. USA

Dr.Prof Mohsin Wali, Physician of 3 Presidents of India

Mr. S.M.ALI, CBI Officer

Mr. Umar Gautam-Reformist

महोदय, विश्वविख्यात मीडिया हाउस “आपकी आवाज़.काम” के ये चारो प्रोजेक्ट दीन-दुनिया की चौतरफा कामयाबी का मुल्क में सबसे बेहतर, आसान, किफायती, भरोसेमंद व स्व-रोज़गार देने वाले 4 सूत्रीय बेमिसाल सोशल पार्लियामेंट, ई-लाईब्रेरी, राहत फाउंडेशन और इंफार्मेंशन सेंटर पर आधारित कार्यक्रम है। इस जैसी मुल्क में अपनी किसी तंजीम का नाम बताने वाले को 2 लाख रुपये इनाम दिया जायेगा। अधिक जानकारी के लिए web/fb/twitter: www.AapkiAwaz.Com पर Hindi/English में नीचे पढ़ियें या मोबाईल 9213344558 पर मिस्डकाल दीजियें।

Sir/ Madam, World-renowned media house “Aapkiawaz.com” presents the following four projects which guarantee all round development and success in this world and the hereafter. The project is based on the country’s best, easiest, most economical, and trustworthy four-point program namely: social parliament, E-library, Rahat foundation and Information centre. We offer a reward of Rs 2 lakh to any person who can provide the name of an organisation working on the same pattern across the country. For more information, follow us on web/fb/twitter: www.AapkiAwaz.com. Read more below in Hindi/English. You can also give us a missed call on 9213344558

1.सोशल पार्लियामेंटः अल्पसंख्यको को पवित्र कुरआन की आयत ‘amru-hum shura baina-hum’ (ऐ ईमानवालो) अपने कामों को आपसी मशवरे से किया करो” (42:38) यानी “शूरा” (सोशल पार्लियामेंट) तथा वैचारिक समानता वाले बहुसंख्यक बहुल संगठनों व पार्टियाँ आदि को “साथ दो-साथ लो” के सिद्धान्त पर आमंत्रित किया जा रहा है, ताकि  इसके ज़रिये आपसी सलाह-मशवरे से मुल्क के अवाम खासकर मुसलमानों के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षिक, धार्मिक व पारिवारिक समस्याओं के समाधान, अधिकार व कर्तव्यों की जानकारी तथा भ्रष्टाचार व अपराध से मुक्त बनाने के कानून व संविधान की हद में रहते हुए हर संभव प्रयास के जरिये आदर्श समाज की स्थापना करना है।

1. Social Parliament: Under this programme minority groups are invited to work along with institutions of majority group on common grounds, on the basis of “Mutual cooperation”. The Social Parliament will work as guided in Holy Quran through its verse ‘amru-hum shura baina-hum’ that translates to (O believers) take your decisions after mutual discussions”(42:38) by forming Shura. So that social, political, economic, educational, religious and family problems of people across the country specially those of Muslims can be solved. This step will help in establishing corruption and crime free society while making general public aware about its rights and duties.

2.  ई-लाईब्रेरी आफ रिलीजंसः धार्मिक एकता के लिए विश्व के सभी धर्मो की अहम किताबों को यूनीकोड में आनलाईन के ज़रिये पुण्य काम की शुरुआत कर रहे है. ये करोड़ो लोगो तक घर बैठे धर्म का ज्ञान देकर हजारो इदारे कायम करने से बड़ा काम होगा. इन किताबों को दुनियाँ के 52 भाषाओं में पढ़ा जा सकेगा। कोई भी व्यक्ति किसी भी किताब की सिर्फ टाईपिंग का खर्च देकर स्पांसर कर सकता है. साथ ही परिवार के किसी भी सदस्य-पूर्वज के लिए पाठको से मोक्ष-मग़फिरत की कामना या दुआ की अपील या अपने व्यापार का विज्ञापन भी दे सकता है।

2. E-Library of Religions: We took the initiative to make available online books of major religions in the world. Anyone can contribute by sponsoring a book. It will reach out to millions of people right in their homes and provide widespread knowledge of religion which is better than establishing thousands of institutions. The books can be accessed in 52 languages across the world. Anyone can sponsor the books. All he/she needs to do is bear the typing cost and related charges with it. Request for prayer for their deceased loved ones, parents, family members and appeal for business etc can also be included in it.

3. सूचना एवं सहायता केंद्रः  समाज के चौतरफा विकास के लिए देश-विदेश में शिक्षा, रोजगार, व्यापार, इंवेस्टमेंट, कानूनी सलाह, प्रापर्टी, स्वास्थ, पेटेंट, आरटीआई, इंवेस्टमेंट, तलाशे-रिश्ता, प्रिटिगं, टैक्स, रजिस़्ट्रेशन, इंसोरेंस, टुर एंड ट्रेवेल, साफ्टवेयर-वेबसाईट डेवेलपमेंट आदि  से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी. अपने प्रोडक्ट-सेवाओं को पैनेल में शामिल कराने या पारिवारिक जरुरतों के समाधान की हर संभव सहयोग-सहायता व जानकारी हासिल कर सकते है.

3. Center for Information & Assistance: For all-round development of society, availability of information regarding education, employment, media, government schemes, import-export, trade, investment, legal advice, property, health, services, advertising, agriculture, mechanic, technician, taxes, printing, RTI, matrimonial, full-time or part-time jobs, etc. is important. The program aims to offer information on above mentioned issues and more. 

4.  राहत फाउंडेशन आंफ इंडिया (रजि0 ट्रस्ट का उपक्रम) का मुल्क में अपने तरीके का पहला बैतुलमाल क़ायम करने का फैसला लिया गया है। जिसकी प्रमुख वजह है कि अखबारों के मुताबिक़ लगभग 1 लाख  करोड़ रुपये सालाना मुल्क के मुसलमानों के वेलफेयर व चेरिटी पर ज़कात आदि के ज़रिये  खर्च होता है..लेकिन फिर भी 12 महीने हर इदारे में चंदा होता ही रहता है तो आखिर वो पैसे जाते कहाँ हैं और उसके नतीजे क्यों नही नज़र आते है ? ज़कात फर्ज़ है इसलिए इसके सही इस्तेमाल को यक़ीनी बनाना भी हम मुसलमानों की जिम्मेदारी है। क्योंकि ज़कात आदि की अदायगी ही काफी नहीं है..बल्कि ज़रुरतमंद की तहक़ीक व तस्दीक़ भी उसका अहमतरीन हिस्सा है जो काम सोशल पार्लियामेंट जैसा इदारा जिसके सदस्य पूरे देश में होने की वजह से बेहतर तरीके से कर सकता है। 100% पारदर्शिता, योगदानकर्ता को ही सारा अधिकार, आमद-खर्च के एक-एक पैसे का आनलाईन हिसाब, फर्जी चंदा करने वालों व 60-80% कमीशन से हिफाज़त आदि मौजूद होना इसे बेमिसाल बनाती है।

4. Rahat Foundation of India: (an organ of Regd Trust) similar to Islamic Baitul Mal concept is an effective way to serve the humanity. The basic reason for taking this step is that according to news reports, around one lakh crore rupees per annum is spent on welfare and charity in the form of Zakat in the Muslim community yet the task of ‘chanda’ or donation collection goes on all the year round in various institutions. But where does the money go? Why don’t we see any positive development? Since Zakat/Donation is obligatory on those who are eligible to pay, it is our responsibility as a muslim to make sure that it is used in the best possible way. It is not merely sufficient to pay Zakat but to guarantee that the money reaches the right person who deserves it is also part of it. Its functioning will be completely transparent with day to day report at www.AapkiAwaz.Com, systematic and verification based. This will probably be first of its kind organization in the country to work on this pattern. It will cover both long term and short term proposals inclusive of but not limited to facilitating setup of taking care of unclaimed bodies, legal assistance to those who finished serving jail terms, Free coaching, building and taking care of Masjids in poor areas, orphans, widows, helpless and needy persons along with promise to extend full possible support to the administration as and when  required. It will have 100% transparency, all rights reserved for the donor, online details of the donations, protection from fraud, and cutting down commission rates of 60-80%. 

 

A brief of Long term programs is as under:

SOCIAL PARLIAMENT

Fard Qayam Rabt-e-Millat Se Hai, Tanha Kuch Nahin

Mouj Hai Darya Mein Aur Bairun-e-Darya Kuch Nahin  – Allama Iqbal

जनाब, आपकी खिदमत में विश्वविख्यात मीडिया हाउस व पोर्टल आपकीआवाज़.कांम का उपक्रम “सोशल पार्लियामेंट” के नाम से मुल्क के मुसलमानों को “शूरा” और गैर मुस्लिमों को “साथ दो-साथ लो” के आधार पर मुत्तहिद व मुत्तफिक़ करने की मुल्क में  सबसे बड़ी व बेमिसाल कोशिश का मुख्तसर तार्रुफ पेश है। संगठन की बुनियाद कुरआने-पाक की आयत “अम्रहुम शूरा बैनहुम-ऐ ईमानवालों अपने कामों को आपसी मशवरे से किया करो” पर अमल के रुप में किया जा रहा है।

अगरचे मुसलमानों में आज भी मशवरे आम है..और मशवरे की अहमियत, बरकात व अज़मत से सभी वाकिफ भी है, लेकिन आमतौर से ये मशवरे छोटे-छोटे ग्रुप में और उनके एजेंडे और फैसले भी अलग होते है, जिसकी वजह से ही उम्मीद के मुताबिक कामयाब नहीं  हो पाते है। इसी कमी को दूर करने के लिए मुल्क के एक लाख लोगों पर आधारित शूरा की गठन करने का काम लगभग पूरा किया जा चुका है। इसके ज़रिये आपसी सलाह-मशवरे से मुल्क के अवाम खासकर मुसलमानों के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षिक, धार्मिक व पारिवारिक समस्याओं के समाधान, अधिकार व कर्तव्यों की जानकारी तथा भ्रष्टाचार व अपराध से मुक्त बनाने के प्रयास के जरियें आदर्श समाज की स्थापना की जा सके। साथ ही जिसकी जितनी संख्या भारी-उसकी उतनी भागीदारी के उसूल पर सारी कौमों के साथ मिलकर काम करेगें।  

 ये बेमिसाल सामाजिक तंजीम सोशल पार्लियामेंट दिन दूनी-रात चौगुनी रफ्तार से तरक्की करते हुए 5 दिशाओं में कार्यरत हैः

अब तक पूर्व महामहिम न्यायाधीश श्री के.जी. बालाक्रिश्ननन-चीफ जस्टिस-सुप्रिम कोर्ट आफ इंडिया एंव चैयरमैन एनएसआरसी, प्रोफेसर डां0 मोहसिन वली- भारत के तीन राष्ट्रपति श्री आर वेकटारमन, श्री शंकर दयाल शर्मा व श्री प्रणव मुखर्जी के फीजीशियन, बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री वामन मेश्रराम, डां फारुक़-हिमालया ड्रग्स के मालिक-डायरेक्टर , इसाई धर्म के गिने चुने प्रतिनिधियों में से एक डां जाँन दयाल साहब-राष्ट्रीय महासचिव, सीबीआई के उच्च अधिकारी श्री एस.एम.अली, भाई तेज सिंह-अंबेडकर पार्टी आंफ इंडिया,विश्व की सबसे बड़ी आल इंडिया दलित कंफेड्रेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक कुमार,  ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष- श्री आमिर रशादी मदनी, एसडीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव- श्री मो. शफी आदि का पूरा सहयोग व मार्गदर्शन मिल रहा है।

1. विदेशों में एनआरआई 116 देशों की भारतियों की सामाजिक, लीगल व मानवाधिकार वाली तंजीमों को शामिल करने की दिशा में जबरदस्त हिम्मत अफज़ाई मिल रही है।

2. देश में 1 लाख मुस्लिम बुद्धिजीवियों व सक्रिय व्यक्तियों पर आधारित “नेशनल एडवाईज़री कौसिल” के गठन का काम लगभग पूरा कर लिया गया है।

3. देश की एकता, सौहार्द व धार्मिक भाईचारा के लिए सतत प्रयत्नशील देश के 1000 से अधिक तंजीमो व महानुभावों  से संपर्क करने का काम लगभग पूरा हो रहा है।

4. देश के चुनाव आयोग से पंजीकृत 1841 राजनीतिक पार्टियों को “जिसकी जितनी संख्या भारी-उसकी उतनी भागीदारी” तथा “साथ दो-साथ लो” के सिद्धान्त पर शामिल किया जा रहा है। जिसकी जाति या धर्म वालों की जनसंख्या जिस चुनावी क्षेत्र में ज्यादा होगी, उसी कौंम के पार्टियों के पदाधिकारी व गणमान्य व्यक्ति उस क्षेत्र के किसी योग्य व जीतने की संभावना वाले किसी एक उम्मीदवार का चयन करेगें, और सभी एक दूसरे के तय उम्मीदवार को जिताने में परस्पर सहयोग देगें। लेकिन जिस चुनावी क्षेत्र मे जिस पार्टी का उम्मीदवार होगा..उसमें उस से मशवरा नहीं किया जायेगा तथा चयन करने में किसी धर्म या जाति की शर्त नहीं होगी।

5. सोशल पार्लियामेंट में सबको बराबर का अधिकार, न चुनाव व न चंदा तथा संविधान व कानून की सीमा में रहते हुए आम सहमित-बहुमत के आधार पर फैसले का प्रावधान है। खास बात ये है कि इसके प्रचार प्रसार में पार्ट टाईम-फुल टाईम सहयोग देकर स्थायी मुनासिब आमदनी  भी हासिल कर सकते है। उपरोक्त कार्यो में आप अपना किसी भी तरह से सहयोग-सहमती दे सकते है. 

सोशल पार्लियामेंट बेमिसाल क्यों है

      1. इस संगठन में कई मुंफरिद तरीकेकार अपनाये गये है जैसे नाम सोशल पार्लियामेंट रखा यानी आम तंजीमों में आये साल होने वाले प्रेसिडेट-सेक्रेट्रेरी आदि के चुनाव की जगह पर सभी सदस्य स्थायी होगें यानी झगड़े की जड़ से दूर रखा है।
      2. संगठन के खर्चों के लिए चंदे या सदस्यता शुल्क के बदनाम तरीके से पाक रखा है। लेकिन जरुरत पड़ने पर बहैसियत लोगों से स्वेच्छा से स्पाँसर्शिप, विज्ञापन व स्वरोज़गार के तरीके  को वरीयता दी जायेगी।
      3. भविष्य में किसी भी तरह के सदस्यों की कानूनी परेशानियों को हल करने  के लिए उनकी जगह पर सभी फैसले या अमल की कानूनी व एखलाक़ी जिम्मेदारी संगठन के जिम्मेदारों की होगी।
      4. संगठन की सदस्यों के लिए बहुमत के फैसले को मानने की सिर्फ शर्त है, लेकिन एक्टिव न रहने, अपनी राय थोपने की जिद करने, या भ्रष्टाचार, अपराध, अफवाह फैलाने, समाज-देश-संगठन विरोधी कार्यो में लिप्त होने की शिकायत मिलने या नियमों की खिलाफवर्जी करने वाले को कभी भी संगठन से निकालने व किसी अन्य का भी नाम शामिल करने का अधिकार आपकी आवाज़.कांम के पास पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा।
      5. सोशल पार्लियामेंट के आमतौर से सभी फैसले आम राय या बहुमत के आधार पर ही किये जायेगे।
      6. भारतीय समाज लगभग 5 प्रमुख भागों हिस्सों में विभाजित है.. अ) मुस्लिम, ब) दलित, स) साप्रंदायिक हिन्दू, द) सेकुलर हिन्दू और य) अल्पसंख्यक कौमें है यानी देश में सांप्रदायिक ग्रुप के बढ़ते प्रभाव व मनमानी से ही आम जनता चिंतित है। इसलिए बाकीं सभी वर्गों से “साथ दीजिये-साथ लीजिये” के सिद्धान्त पर अर्थात जिस काम में उन्हें या हमें नुक़सान या एतराज़ नहीं होगा उसमें परस्पर भरपूर सहयोग लिया व दिया जा सकता है। 
      7. सारे फैसले 100% पारदर्शिता बनायें रखने के लिए हाईली टेकनोलाजी का प्रयोग होगा। 
      8. आमतौर से राय आनलाईन ली जायेगी यानी कोई भी भारतीय देश-विदेश में रहते हुए कही से भी कोई भी नियमानुसार  ईमेल, एप, एसएमएस, वाट्सअप, सोशल मीडिया आदि के जरिये अपनी राय दे सकता है। 
      9. संगठन को बेहतर व भरोसेमंद बनाने वाली किसी की, कभी भी व कोई भी राय का हमेशा खैरमकदम किया जायेगा और यथासंभव बदलाव किया जा सकता है।
      10. शुरुआती सदस्यों की तादाद 1 लाख रखने का लक्ष्य को पूरा करने के लिए शुरुआत अहमतरीन तंजीमों आईआईसीसी, मुशावरत, पर्सनल लाँ बोर्ड, आल इंडिया की मुस्लिम डाक्टर एसोसियेंशन, एडवोकेट, प्रोफेशनल, एएमयू-जामिया बांयज़, एंजिओ, इदारों आदि से 10,000 नाम लिए गये, बाकि सभी सदस्यों की तरफ से 10 नाम देने की अपील की गई, ताकि पूरा संगठन मुखलिसों व उनकी तरफ से दिये नामों पर ही आधारित हो।
      11. संगठन सिर्फ “कामन मिनिमम प्रोग्राम” के बुनियादी सिद्धांत पर उन विषयों पर ही मशवरा करेगा जिसका संबंध 70-90% देशवासियों या मुसलमानों से होगा। संगठन के मशवरे आमतौर से मुसलमानों से ही लिये जायेगें, इसकी वजह एक तरह के लोगों के मसायल एक तरह के होते है..जैसे बैंक, रेलवे, डाक्टर आदि की अगल-अगल एसोसिएशन होती है।
      12. समय समय पर मिलने वाली रायों या फैसलों के बारे में आमतौर से मुल्क के दानिश्वरों से सलाह मशवरा करने के बाद ही फैसले लिये जायेगें।
      13. संगठन के सदस्यों के नाम आपकी आवाज़.काँम के डाटा बेस में महफूज़ रहेगें..यानी सिर्फ वही राय दे सकेगें।
      14. मिटिंगों में “दस्तरख्वान पर मशवरा” जैसे नायाब तरीके पर अमल किया जा सकता है यानी मीटिंग के दौरान खाने का वक्त होने पर सदस्य टिफिन अपने साथ ही लाया करेगें।
      15. सदस्यता अभियान के तहत लगभग 1 लाख से ज्यादा मुल्क की अहमतरीन शख्सियतों को ईमेल, सोशल मीडिया, वाट्सअप व फोन आदि से दावत दी जा रही है और नतीजे 99% पाजिटिव मिल रहे है।
      16. इच्छानुसार सदस्यों व राय देने वालों के नामों की पहचान गुप्त रखी जा सकती है।
      17. विदेश की शिक्षा, रोजगार, शान्ति, भाईचारा व मानवतावादी संगठनों के साथ परस्पर सहयोग करना। संगठन के सारे कार्य देश के कानून व संविधान के अक्षरतः पालन के साथ किये जायेगें।
      18. फाउंडर यानी हमारे बारे में जानने के लिए आपकी आवाज़.काँम के होम में एबाउट अस में देख सकते है।         आपसे हम क्या चाहते हैः
      1. इस मुहिम की शुरुआत मुल्क के लगभग 1000 अल्पसंख्यक-दलित बहुल विधानसभाओं में से किसी एक उम्मीदवार को चुनने के लिए आमतौर से उस विधानसभा से संबंधित लगभग 1000 लोगों के मशवरे से तय करके उसे जिताने की कोशिश  करेगें। आगे भविष्य में उन चुनावी क्षेत्रो के अच्छे उम्मीदवार की पहचान करके उसे आगामी चुनावों में टिकट दिलानें में मदद करने से किया जायेगा। इसलिए अपने शहर-स्टेट की ऐसी सीटों की और उस क्षेत्र के अच्छे लोगों की निशानदेही में हमारा सहयोग करिये ताकि ये काम पूरी संजीदगी से किया जा सके।
      2. देशवासियों में से उपरोक्त श्रेणियों के दलित, सेकुलर व दीगर अल्संख्यकों के संजीदा व सक्रीय व्यक्तियों व संगठनो के जिम्मेदारों से संपर्क करने में सहयोग की उम्मीद करते है। साथ ही मुल्क के 30 करोड़ मुसलमानों में से सिर्फ 1 लाख जिम्मेदार हस्तियों को तलाश करके शामिल करने का नाम ज्यादा मुश्किल नहीं है। बरायेकरम सहयोग दीजिये।
      3. आपकी आवाज़.काम के ओपीनियन पोल में शामिल होकर  आपनी राय देने का कष्ट करें। ताकी पार्टियों का पारदर्शी रिपोर्ट कार्ड  जा सके।
      4. आपकी आवाज़.कांम के मैसेज को सोशल मीडिया, वाटसअप व ईमेल आदि के जरियें ज्यादा से ज्यादा दोस्तो को फारवर्ड करके कारेखैर को कामयाब बनाने से सहयोग दीजियें।

आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा, सक्रियता व निष्पक्षता को देखते हुए आपका नाम “राष्ट्रीय सलाहकार कौंसिल” में शामिल करने का प्रस्ताव है, ताकि आपके ज्ञान, अनुभवों व निःस्वार्थ भाव से समाजसेवा की भावना का सदुपयोग किया जा सके। अतः हमें आशा ही नही विश्वास है कि आप सहमति देकर देश-समाजहित में कार्य करने में अवश्य मार्गदर्शन करेगें- धन्यवाद।

जानकारी के लिए इस लिंक पर https://www.facebook.com/groups/540484099697489/ रिक्वेस्ट करियें  या 9213344558 (MATLOOB) पर मिस्डकाल दीजियें-शुक्रिया।

For more information send a request on https://www.facebook.com/groups/540484099697489/ or give a missed call on 9213344558 (Matloob)

मुत्तहिद हो तो बदल डालो निज़ाम-ए-गुलशन मुन्तशिर हो तो मरो, शोर मचाते क्यों हो ?

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1.A BRIEF INTRODUCTION OF SOCIAL PARLIAMENT

Sir/Madam,

On behalf of world renowned news portal www.aapkiawaz.com, we present a brief introduction of ‘social parliament’, a unique and unmatched endeavor to unite and build consensus among the Muslim community in India.

The organization is founded upon the principle drawn from the verse of the Qur’an, اَمْرُهُم شُوْرٰی بَينَهُمْ (the affairs [of the Muslims] are run on mutual consultation (42:38)).

Though consultation is popular among Muslims even today, and its importance and benefits are common knowledge, these dialogues are held on different agendas in small groups resulting in varied decisions. As a result, the desired success has not been achieved.

To overcome this shortcoming, we have planned to formulate a Shu’ra, or council, of one lakh people from across the country so that we are able to build consensus on one decision, just as we worship one God, Allah, follow one prophet, Muhammad SAW, and take guidance from one book, the Holy Qur’an.

Under this plan, solution of issues mainly, social, political, economic, educational, religious, and family in 1000 constituencies across the country will be achieved through mutual consultation besides efforts to spread awareness regarding rights and duties, and to fight crime and corruption.

In order to test its efficiency, a reward of Rs. one lakh was announced before more than 25 lakh people to anyone who could point out any major flaw in the plan but by the Grace of Allah everyone has applauded it.

WHAT MAKES THE ORGANIZATION UNIQUE?

      1. The organization has adopted several unique approaches, for instance, the choice of name ‘social parliament’ where the idea is to do away with the system of annual elections for president and secretary in organizations. Instead, all members are permanent.
      2. To meet the expenses of the organization, the preferred method is voluntary sponsorship and advertisements instead of the infamous methods of donation or membership fee.
      3. To keep members away from any legal hassles, the organization will bear the legal and ethical responsibility of any decisions or actions taken in future.
      4. All members must accept the decision of the majority. www.aapkiawaaz.com reserves the right to expel or replace any member in case he/she remains inactive, insists on imposing his/her opinion, or is found to be involved in corruption, crime, rumour mongering, or any other anti-national, anti-social, or anti-organizational activities.
      5. All decisions of the social parliament will be made on the basis of popular opinion or majority votes.
      6. The Indian social fabric is comprised of five nearly equal parts. a) Muslims b) Dalits c) Communal Hindus d) Secular Hindus, and e) Other minority communities.

Since the general public is concerned with the growing influence of the communal faction in the country, the organization has formulated the principle of ‘Saath Dijiye-Saath Lijiye’ (Give Support, Take Support) among the rest of the groups, i.e., mutual support will be provided in matters mutually agreed upon or causing no harm.

      1. All decisions will be 100% transparent, high-tech, and will be taken keeping in mind rights of all parties within the bounds of law and constitution.
      2. The opinion will be online through website, email, app, SMS, WhatsApp and social media which means any Indian citizen can participate from anywhere in the world and lack of time and age will be no bar for membership.
      3. Any opinion, at any point of time, that aims to make the organisation better and dependable will be welcomed and implemented to the best extent.
      4. The initial membership target is 1 lakh. 10,000 names have been selected from various important organisations of the country, including IICC, Mushawarat, All India Muslim Personal Law Board and other professionals like doctors, advocates, AMU and Jamia Alumni, NGOs, and other institutions. All members are appealed to suggest 10 names so that the organization is comprised of members suggested by you.
      5. Under the basic principle of ‘Common Minimum Program’, the organization will discuss only those issues which are related to 70-90% people of the country or the Muslim community. The opinions of Muslim members will be generally considered because common problems are faced by one community. For instance, there are separate associations for bank employees, railway staff or doctors.
      6. Regarding the opinions received from time to time, decisions will be taken based on the advice of intellectuals from all over the country.
      7. The names of members of the organization will be saved in the database on www.aapkiawaz.com. Only those members will be allowed to give their opinion.
      8. Meetings will be held under such innovative banners as ‘Dastarkhwan par mashwara’, i.e., the members will bring their own food and dine together while discussing the issues.
      9. Under the membership drive, we have invited more than 1 lakh personalities from all over the country through email, social media, WhatsApp and phone etc. The results have been positive in 99% cases.
      10. In case any member requests anonymity, their identity will not disclosed.
      11. The organization aims to work alongside foreign organizations working towards education, employment, peace, brotherhood and humanity.
      12. All the functions of the organization will be carried out within the bounds of the law of the country as well as the constitution.
      13. To know about the founder, you may visit http://www.aapkiawaz.com/about-us/.

HOW YOU MAY HELP?

      1. We have started this campaign with 1000 minority-dalit dominated legislative assemblies. On the basis of opinion of 1000 local people, one candidate will be selected and supported in assembly polls. In addition, the best candidate will be identified in the assemblies and helped to get the ticket in upcoming elections. Therefore, help us identify the seats in your state/city and best candidate of the assembly so that this work can be done sincerely.
      2. We expect cooperation from dalits, and other minorities in above mentioned categories in contacting their sincere, secular and active members and leaders. Since finding 1 lakh important personalities from among 25 crore Muslim population of the country is not very difficult, we request your kind support.
      3. Kindly mention the name of your favorite political party in the referendum at www.aapkiawaz.com so that the party is forced to provide detail of their work in favor of or against the Muslim community. With the help of such a report card, the like or dislike for any party can be stated with reason or proof.
      4. Spread this message from www.aapkiawaz.com on social media, WhatsApp, or email. Forward it to your contacts and help us make it a success.

Given your social standing, activism and fairness, your name is proposed to be included in the National Advisory Council, so that your knowledge, experience and selfless service towards the society can be utilized to the best level.

We not only hope but believe that you will give your consent and guidance in working towards building a better society and nation.


2. E-LIBRARY OF RELIGIONS-RELIGIOUS SOLUTION

I would like to take this opportunity to introduce you to “E-library of religions” as under:

Brief description:

It is a universally accepted fact that the top priority of mankind is to lead a peaceful life, to attain salvation, paradise or heaven, and the way goes through religion. There are 11 major religions in the world and they have numerous off-shoots and all claim to be true. However, following any of them is one of the biggest decision of anyone’s life as it defines his/her future.

We were surprised to know when it was brought to our knowledge that there is no single repository of important books of any religions in Indian language available online, except some books in scanned form. The main disadvantage of this is that if anyone wants to search any topic or subject from a particular religious scanned book, it is not possible. Therefore, we decided to provide it in digital searchable form. Apart from that, content in typed form consumes less space and is easily downloadable over device/computer. It can be referred, integrated and propagated easily. It is also compatible with almost all the devices available in the market, can be upgraded for disabled people easily, so on and so forth.

With the aim to serve humanity, to facilitate peaceful co-existence of different religions and to promote the spirit of brotherhood, we are establishing “E-library of religions” for the first time in India. The library will consist of religious books, audio and video etc and will be hosted as ONLINE DIGITAL LIBRARY on www.Lareb.Net.

Apart from the efforts made by the trust any person can get books of any religion typed in Unicode form and seek services of Trust. The contributors can also include prayer message for their relatives who got expired or can put advertisement of their business etc. is. For more you may contact +91 9213344558. Thank you.

2. धार्मिक समाधानः ई-लाईब्रेरी आँफ रिलीजंस

महोदय, आपको सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि विश्वप्रसिद्ध  न्यूज़ पोर्टल “आपकी आवाज़.काँम” विश्व शान्ति व आर्दश भारत बनाने में योगदान देने के महान उद्देश्य से अपने तरीके की पहली “ई-लाईब्रेरी आँफ रिलीजंस” की शुरूआत कर रहे है।

अध्यात्म से मानव का ये और परलोक का जीवन सार्थक हो सकता है। धर्म का सही ज्ञान ही मानव को महात्मा बना देता है तो धर्म से दूरी अक्सर उसे दानव बना देती है. अगरचे आम तौर से सभी धर्मो की प्रमुख पुस्तके आनलाईन मिल जाती है, लेकिन उनमें से अधिकाँश स्कैन करके पोस्ट की गई है। जिसकी वजह से किसी विषय को तलाश करना या रिफरेंस पाने के लिए पूरी किताब पढ़ने के बाद ही संभव हो सकता है, ऐसे में धार्मिक ज्ञान को आम करने व तर्क के लिए संदर्भ की जरुरत को पूरा करने के लिए इस आनलाईन लाईब्रेरी जिसमे यूनीकोड़ अर्थात सर्च वाली सुविधा के साथ महत्वपूर्ण किताबें, आडियों व विडियों आदि पोस्ट करने की महत्वकाँछी योजना बनायी है। जिसमें बिना किसी भेदभाव के विश्व के सभी धर्मों व भाषाओं की महत्वपूर्ण किताबों को आनलाईन स्थान देने की योजना है।

साथ ही उन महानुभावों को ध्यान में रखते हुए जो अपने माता-पिता, सगें-संबंधियों के मोक्ष की कामना के लिए किसी भी किताब को पोस्ट कराना चाहते है. वो केवल उस किताब को यूनीकोड़ में टाईप कराकर या टाईपिंग का इंतजाम लाईब्रेरी की सेवाऐं भी ले सकते है। प्रत्येक किताब के प्रथम पृष्ठ पर स्पांसर का नाम, पता, व्यवसाय और जिसकी कामना के लिए किताब दी गई है.उसके बारे में भी विवरण दे सकते है। किसी भी तरह की जानकारी या सदस्य बनने के लिए WhatsApp/Missed Call/ IMO @09213344558,Visit @Web/Fb/Twi: AapkiAwaz.Com. याhttp://www.aapkiawaz.com/contact-us/ पर संपर्क कर सकते है- शुक्रिया।


 

3. Information & Assistance Center

 We are pleased to inform you that “Information & Assistance Cell” Launched a massive drive in India & abroad as the Cheapest & Best option in terms of rates and Quality of A to Z categories of business & Services. Since you are dealing and having a good reputation in products/Services, avail the golden opportunity and send details of products along with competitive rates and reasons why you are the Cheapest & Best options. If you have possibilities of Franchisee, Agency or promotion scheme, minimum order quantity etc, kindly send details also, so that we can refer and introduce your name along with details in response to queries from India & Abroad. It is free as an introductory offer. Since the ad is the backbone of the business and guarantee of success, and you are interested in direct dealing then avail the golden opportunity by sending your Ad today and only pay token amount as an introductory offer. Priority Ad, Designed ads, Photo, Video, and Extra large ads will be treated as additional. Contact: E-Mail:contect@aapkiawaz.com, Mobile:9213344558.

THE FIELD OF INFORMATION

There are two criteria of membership (i) empanelment (ii) Active Member.  For empanelment your name, address etc & details will be kept in our database We may consider it for quotation as & whenever requirement arises. Secondly, for an active member, any person or company can directly enter by listing their details on Portal/ website by making a very nominal payment:

1. Education:

Online Coaching of board, competitive, entrance & Service exams, Eligibility-Admission for Study in India & abroad, obtaining Recognition process, consultancy, Educational loan, Scholarship, International Fellowship, Distance education in India & abroad, Online degree courses in India & abroad, career Counseling, Franchisee of School etc.

2. Employment:

Full time employment in India/abroad, Part time, Self Employment, Casual Services, Project employment, Employment/Placement Agencies of India & abroad, Job consultancy services etc.

3. Business:

Local, National & International Marketing, Import, Export, Promotion of business, preparation of legal documents, E-Business, Direct Selling: producer to Consumer, Franchisee, Advertizing, source of Sale & purchase, Business Partner, Business with Zero investment, Home based Business etc.

 4. Website designing:

Websites are evaluated using a 100 factor to evaluate the best website i.e. Search Engine Visibility, Search Engine Rankings, URL clarity, Differentiation & Branding Strategy, Business Analysis, Server Security Checks, Hosting Efficiency, Surfer Votes & Customer Endorsements and:

a) Functionality: Accessibility, Speed & Bandwidth Sensitivity, HTML Quality, Navigation & Links, Legality. 
b) Design: Graphic Design, User Friendliness, Aesthetics & Beauty, Alignment & Layout, Integration. 
c) Content: Purpose, Human Interactivity, Information Process, Verbal Expression, Attention to detail. 

d) Originality: Innovation & Lateral Thinking, Creativity, Technology, Distinctiveness, Vision 
e)Professionalism & Effectiveness: Customer Service & Client Respect, Values, Focus, Advanced Components, Overall Site Effectiveness.

5. Software Development:

We assist clients in maximizing business opportunity by designing tailor-made technological solutions and help them in implementing it. And strategic location also makes as competitive in rates, technology and manpower resources. Focus on ease of migration and do not discount the valuable features of the legacy systems. Consider us at extension to your present setup and work. The result oriented focus should ensure an emphasis on translating plans and proposed solutions into reality.

RANGE OF SERVICE

i. Software Development for commercial needs

ii. Embedded System and device driver development

iii. Automation applications

iv. Publishing

v. Development of Promotional Material for business, organizations etc. (i.e. CD based catalogs, websites, advertising material) etc.

vii.Domain Registration and website hosting

viii.Data Conversion services and outsourced work

6. Real State:

Affordable Housing, Upcoming Projects, Agent zone, To-let Zone, Cheap & Best offers, collaboration, Office space, Shop, Residential House/Flat, form House, Agricultural Land, Home Loan, commercial Land, NRI Client, Videos of Sites, Insurance, Investment, Builders, Real Estate agents/consultant in India & abroad, Institution Building etc.

7. Investment:

Online Share Trading of NSE, BSE, F&O, NCDEX, MCX and DGCX (Free Training),  Day TradingStock TradingOptions Trading,  Commodity TradingForex Trading, Primary market, Financial ManagementInvesting GuideRetirement PlanningWealth ManagementBudget PlanningStock ChartsAlternative InvestmentsValue InvestingGrowth InvestingFutures,Stock Market FuturesBondsCommoditiesMutual FundsExchange Traded Funds – ETFs, Life-Health-Non life Insurance etc.

8. Professionals & Service Providers:

Leading Doctors, Advocate, Carter Account, Hakim, Vaidh, Engineer, Architect, Consultancy services software, developer, Website designer, Interior Decorator, Contactor, supplier, School, Caching Center, Translator  etc.

9. Health Care:

FREE Online Consultation from leading healthcare professionals, Senior Hakims, Vaidh in various specialties. Alternative medicine: Acupuncture, Unani medicine, Ayurveda, Homeopathy, yoga, famous medicines of deferent disease, Send in your medical queries and get an opinion, Health Insurance etc.

10. Govt Scheems/grant:

NGO partnership with govt. Industrial Unit Startup Information for NRIs, International ScholarshipsSchemes for Weaker Sections  etc. OBC Commission. Delhi State SC / ST / OBC / Minorities / Hanicapped Finance Development Corporation  Information Technology, Govt. of NCT, Education Schemes, Employment and Training, Rehabilitation Schemes, Social Security Schemes, Senior Citizen Schemes,Recently Launched Schemes, All most all the Ministries/Departments/Government Bodies provide financial assistance.

11. Matrimonial:

Profiles, easy, safe, 100% privacy, verified contact Number, Information supply without disclosing the identity till both parties will be interested to meet each other.

12. Printing:

Printing machine (pad printing, offset, Pack to Pack Machines, Labels and Flexible packaging Flexographic printing machines etc.), Book, Magazine, card, directory, Cloth printing, Flex Banner, Promotional Items, Bottle printing, Apparel & AccessoriesAuto AccessoriesAwards & RecognitionCalendars and PlannersEducational & School Items etc.
Don’t ever hard sell. Solve problems. Satisfy wants. Do what is truly best for your customer.

Leave Your Comfort Zone
Never accept the idea that this is the way you’ve always done it. Never accept that a new idea or technology could never work for you.


 4.RAHAT FOUNDATION OF INDIA-SOCIAL SOLUTION

 4.सामाजिक समाधानः राहत फाउंडेशन आंफ इंडिया

 

Assalam Alaikum, After the successful formation of the “National Advisory Council” based on one lakh members of Social Parliament with the commendable support from across the country, the task of seeking Opinion” has started. But the results are not as expected. So, we have decided to replace the members who fail to actively participate in the project and instead add members who are active. We hope this would give better results.

As such the previous project is basically complete. So, with the blessings and guidance of our active members, we have decided to launch a unique Bait-ul-Maal “Rahat Foundation of India” (An organ of the regd. Trust). The basic reason for taking this step is that according to news reports, around one lakh crore rupees per annum is spent on welfare and charity in the form of Zakat in the Muslim community yet the task of ‘chanda’ or donation collection goes on all the year round in various institutions. But where does the money go? Why don’t we see any positive development?

Since Zakat is obligatory on those who are eligible to pay, it is our responsibility as a Muslim to make sure that it is used in the best possible way. It is not merely sufficient to pay Zakat but to guarantee that the money reaches the right person who deserves it is also part of it. This is what Social Parliament aims to do with the help of its one lakh members spread all across the country.

WHY IS RAHAT FOUNDATION THE BEST OPTION?

      1. The details about the monetary donations made to the foundation as well as the name and address of the donor will be available on aapkiawaz.com along with the details of the reason why and on whom the money was spent along with their phone number and address. This is something no other organization or foundation does.
      2. 2. The money will only be spent as per the advice, help, reference, and recommendation of Social Parliament members. It will help to curb monopoly and corruption.
      3. 3. It will also reduce fraud and misuse of charity funds.
      4. 4. It will considerably bring down the current commission rate of 60-80% ultimately leading to full utilization of the funds to help the needy.
      5. 5. The amount handed out to the unemployed and the needy is a kind of loan as it is preferable for them to find a respectable way to earn a living rather than just beg for money.
      6. 6. The contribution amount can be at least @ Re.1 per day also may be members of the national advisory council of social parliament.
      1. The foundation will accept money only from people referred by members of Social Parliament.
      2.  Any concession offered in any of the institutes of the foundation will be provided only on the recommendation of social parliament members to protect the organization from fraudsters and malicious elements.
      3.  Aapkiawaz reserves the right to form or change the rules as and when required as also to terminate the membership of any members. The decision will be final. 10. Any member who contributes an amount can submit a proposal only for double that amount or seek concession. 11. The foundation will have no representative for collecting funds. As soon as any contribution is made both the donor and the mediator will be informed. All responsibility at the time of the contribution will be on the donor.

For more information give a missed call on 9213344558 (Matloob) or Visit at Aapkiawaz.com Plz Contribute Amount/bank interest etc: Rahat Foundation of India..SBI Zakir Nagar Branch, New Delhi. Account No.32833959520, IFSC: SBIN0008079, CIF No.86621167057.-  Thank you। Plz “Like ✔ Comment ✔ Tag ✔ Share.

4. राहत फाउंडेशन आंफ इंडिया का संक्षिप्त परिचय

अस्सलाम अलैकुम..सोशल पार्लियामेंट के 1 लाख गणमान्य सदस्यों पर आधारित “नेशनल एडवाज़री कौसिल” के गठन में पूरे मुल्क से क़ाबिले तारीफ सहयोग की वजह से मिली शानदार कामयाबी का बाद “मशवरा” लेने का काम शुरु कर दिया गया है। लेकिन नतीजा उम्मीद के मुताबिक़ नही है। इसलिए अब सिर्फ जो जवाब नही देते है उनको हटाकर उनकी जगह एक्टिव लोगों को शामिल करने का काम चल रहा है और जैसे-जैसे अच्छे लोग शामिल व बेकार के लोग निकलते जायेगें..इंशा अल्लाह उतने ही अच्छे नतायज़ मिलते रहेगें। इस तरह ये प्रोजेक्ट बुनियादी तौर पर पूरा हो चुका है।

इसलिए अब इन्ही सदस्यों की दोवाओं व रहनुमाई से एक बेमिसाल बैतुलमाल “राहत फाउंडेशन आंफ इंडिया” (रजि0 ट्रस्ट का उपक्रम) नाम से क़ायम करने का फैसला लिया गया है। जिसकी प्रमुख वजह है कि अखबारों के मुलाबिक़ लगभग 1 लाख  करोड़ रुपये सालाना मुल्क के मुसलमानों के वेलफेयर व चेरिटी पर ज़कात आदि के ज़रियें  खर्च होता है..लेकिन फिर भी 12 महीनें हर इदारे में चंदा होता ही रहता है तो आखिर वो पैसे जाते कहा है और उसके नतीजे क्युं नही नज़र आते है। ज़कात फर्ज़ है इसलिए इसके सही इस्तेमाल को यक़ीनी बनाना भी हम मुसलमानों की जिम्मेदारी है। क्योंकि ज़कात आदि की अदायगी ही काफी नहीं है..बल्कि ज़रुरतमंद की तहक़ीक व तस्दीक़ भी उसका अहमतरीन हिस्सा है जो काम सोशल पार्लियामेंट जैसा इदारा जिसके सदस्य पूरे देश में होने की वजह से बेहतर तरीके से कर सकता है।

राहत फाउंडेशन मुल्क में सबसे बेहतर इदारा क्यों है?

      1. फाउंडेशन की आमदनी व खर्च के एक-एक पैसे का हिसाब-किताब, पैसे देने वालों के नाम व पते, जहाँ पर पैसे खर्च किये है और उसकी वजह की तफसीली जानकारी फोटो, पते व फोन नंबर आदि के साथ AapKiAwaz.com पर मौजूद होगी, जबकि ऐसा शायद ही कोई भी इदारा व तंजीम ऐसे करता हो।
      2.  इन पैसों का इस्तेमाल सोशल पार्लियामेंट के सदस्यों की राय, सहयोग, रिफरेंस व रिकमेंडेशन आदि से ही सिर्फ किया जायेगा यानी मनमानी पर लगाम लगेगी।
      3.  इस तरह से फर्ज़ी चंदा वसूलने वालों की नकेल कसने व असली हक़दार की मदद की जा सकेगी।
      4.  आमतौर से 60-80% तक कमीशन को कम से कमतर करके ज़्यादा से ज्यादा ज़रुरतमंदों की मदद की जा सकेगी।
      5. काबिले वापसी शर्त पर एक मुश्त मदद देकर बेरोजगारों, भीख मांगने के लिए मजूबर लोगों को अपने पैरो पर खड़े करने को तरजीह दी जायेगी।
      6. सहयोग राशि कम से कम 1 रुपये प्रतिदिन की दर ही हो सकती है और वो भी सोशल पार्लियामेंट के नेशनल एड़वाईज़री कौसिल के सदस्य होंगे।
      7.  फाउंडेशन सिर्फ और सिर्फ सोशल पार्लियामेंट के सदस्यों के रिफरेंस से ही कोई भी सहयोग राशि लेगा।
      8. फाउंडेशन के क़ायम कर्दा किसी भी इदारे में किसी भी तरह की रियायत सोशल पार्लियामेंट के सदस्यों के रिकेमेंडेशन पर ही दी जायेगी ताकि फितना परवर, मुफ्तखोर व फर्जी दावेदारों से फाउंडेशन महफूज़ रह सकेगा ।
      9. समय समय पर आवश्यकतानुसार नियम बनाने व फेर-बदल करने व किसी की भी सदस्यता समाप्त करने का पूरा अधिकार Aapkiawaz के पास सुरक्षित व फैसला अंतिम व सर्वमान्य होगा। 10. कोई भी सदस्य अपने व अपने जरियें से जमा करायें गये पैसे दुगनी रक़म तक के ही प्रपोज़ल दे या रियायत की माँग आम तौर से कर सकता है। 11. फंड जमा करने के लिए फाउंडेशन का कोई नुमाइंदा नहीं होगा और पैसे यहाँ आते ही पैसे देने व दिलवाने वाले को इत्तला दी जायेगी..यानी उससे पहले की सारी जिम्मेदारी पैसे देने व दिलवाने वाले की ही होगी।

अधिक जानकारी के लिए 9213344558 (Matloob) पर मिस्डकाल दीजियें या Visit at Aapkiawaz.com Plz Contribute Amount/bank interest etc: Rahat Foundation of India..SBI Zakir Nagar Branch, New Delhi. Account No.32833959520, IFSC: SBIN0008079, CIF No.86621167057.- शुक्रिया। Plz “Like ✔ Comment ✔ Tag ✔ Share.   

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