1.Social Parliament

SOCIAL PARLIAMENT

Fard Qayam Rabt-e-Millat Se Hai, Tanha Kuch Nahin

Mouj Hai Darya Mein Aur Bairun-e-Darya Kuch Nahin- Allama Iqbal

जनाब, आपकी खिदमत में विश्वविख्यात मीडिया हाउस व पोर्टल आपकीआवाज़.काँम की “सोशल पार्लियामेंट” के नाम से मुल्क के मुसलमानों को मुत्तहिद व मुत्तफिक़ करने की सबसे बड़ी व बेमिसाल कोशिश का मुख्तसर तार्रुफ पेश है। संगठन की बुनियाद कुरआने-पाक की आयत “अम्रहुम शूरा बैनहुम-ऐ ईमानवालों अपने कामों को आपसी मशवरे से किया करो” पर अमल में किया जा रहा है। अगरचे मुसलमानों में आज भी मशवरे आम है..और मशवरे की अहमियत, बरकात व अज़मत से सभी वाकिफ भी है, लेकिन आमतौर से ये मशवरे छोटे-छोटे ग्रुप में और उनके एजेंडे और फैसले भी अलग होते है जिसकी वजह से ही उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नही मिल पा रही है। इसी कमी को दूर करने के लिए मुल्क के 1 लाख लोगों आधारित शूरा की तशकील देने का फैसला लिया गये है..ताकि हमारा अल्लाह, सच्चे रसूल, काबा व क़ुरआन एक है तो फैसले भी एक ही होना चाहियें। इसके ज़रिये आपसी सलाह-मशवरे से मुल्क के 1000 विधानसभाओं सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षिक, धार्मिक व परिवारिक समस्याओं के समाधान, अधिकार व कर्तव्यों की जानकारी तथा भ्रष्टाचार व अपराध से मुक्त बनाने के प्रयास के जरियें आदर्श बनाया जा सके।  टेस्टिंग के लिए इस जैसी मुल्क में किसी तंजीम का नाम या इसमें कोई बड़ी कमी बताने वाले को 1 लाख रुपये बतौर इनाम देने का ऐलान 25 लाख से ज्यादा लोगों तक किया गया लेकिन खुदा का शुक्र है सभी ने खूबियों को तस्लीम किया।

तंजीम युनीक क्युँ है

  1. इस संगठन में कई मुंफरिद तरीकेकार अपनाये गये है जैसे नाम सोशल पार्लियामेंट रखा यानी आम तंजीमों में आये साल होने वाले प्रेसिडेट-सेक्रेट्रेरी आदि के चुनाव की जगह पर सभी सदस्य स्थायी होगें यानी झगड़े की जड़ से दूर रखा है।
  2. संगठन के खर्चों के लिए चंदे या सदस्यता शुल्क के बदनाम तरीके से पाक रखा है। लेकिन जरुरत पड़ने पर बहैसियत लोगों से स्वेच्छा से स्पाँसर्शिप या विज्ञापन लेने के तरीके को वरीयता दी जायेगी।
  3. भविष्य में किसी भी तरह के कानूनी पचड़े से सदस्यों को दूर रखते हुए उसकी जगह पर सभी फैसले या अमल की कानूनी व एखलाक़ी जिम्मेदारी संगठन के जिम्मेदारों की होगी।
  4. संगठन की सदस्यता के लिए बहुमत के फैसले के मानने की सिर्फ शर्त है, लेकिन एक्टिव न रहने, अपनी राय थोपने की जिद करने, या भ्रष्टाचार, अपराध, अफवाह फैलाने, समाज-देश-संगठन विरोधी कार्यो में लिप्त होने की शिकायत मिलने या नियमों की खिलाफवर्जी करने वाले को कभी भी संगठन से निकालने व किसी अन्य का भी नाम शामिल करने का अधिकार आपकी आवाज़.कांम के पास पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा।
  5. सोशल पार्लियामेंट के सभी फैसले आमराय या बहुमत के आधार पर ही किये जायेगे।
  6. भारतीय समाज 5 प्रमुख भागों तकरीबन बराबर-बराबर हिस्सों में विभाजित है.. अ) मुस्लिम, ब) दलित, स) साप्रंदायिक हिन्दू, द) सेकुलर हिन्दू और य) अल्पसंख्यक कौमें है यानी देश में सांप्रदायिक ग्रुप के बढ़ते प्रभाव व मनमानी से ही आम जनता चिंतित है। इसलिए बाकीं सभी वर्ग से “साथ दीजिये-साथ लीजिये” के सिद्धान्त पर अर्थात जिस काम में उन्हें या हमें नुक़सान या एतराज़ नहीं होगा उसमें परस्पर भरपूर सहयोग किया जायेगा।
  7. सारे फैसले 100% पारदर्शिता, हाईटेकनिकल के अलावा सभी को बराबर का अधिकार तथा कानून व संविधान की सीमा में रहते हुए किये जायेगें।
  8. राय आनलाईन ली जायेगी यानी कोई भी भारतीय देश-विदेश में कही से भी सिर्फ बमुश्किल 2 मिनट में वेबसाईट, ईमेल, एप, एसएमएस, वाट्सअप, सोशल मीडिया आदि के जरिये अपनी राय दे सकता है यानी समय की कमी या उम्र, सदस्य न बनने की वजह नहीं हो सकती है।
  9. संगठन को बेहतर व भरोसेमंद बनाने वाली किसी की, कभी भी व कोई भी राय पर हमेशा खैरमकदम करेगा और यथासंभव बदलाव के तैयार होगा।
  10. शुरुआती सदस्यों की तादाद 1 लाख रखने का लक्ष्य है, और इन सदस्यों को मुल्क की अहमतरीन तंजीमों आईआईसीसी, मुशावरत, पर्सनल लाँ बोर्ड, आल इंडिया की मुस्लिम डाक्टर, एडवोकेट, प्रोफेशनल, एएमयू-जामिया बोयाज़, एंजिओ, इदारों आदि से 10,000 नाम लिए गये है, बाकि सभी सदस्यों की तरफ से 10 नाम देने की अपील है, ताकि पूरा संगठन मुखलिस व आपकी तरफ से दिये नामों पर ही आधारित हो।
  11. संगठन सिर्फ “कामन मिनिमम प्रोग्राम” के बुनियादी सिद्धांत पर उन विषयों पर ही मशवरा करेगा जिसका संबंध 70-90% देशवासियों या मुसलमानों से होगा। संगठन के मशवरे आमतौर से मुसलमानों से ही लिये जायेगें, इसकी वजह एक तरह के लोगों के मसायल एक तरह के होते है..जैसे बैंक, रेलवे, डाक्टर आदि की अगल-अगल एसोसिएशन होती है।
  12. समय समय पर मिलने वाली रायों या फैसलों के बारे में आमतौर से मुल्क के दानिश्वरों से सलाह मशवरा करने के बाद ही फैसले लिये जायेगें।
  13. संगठन के सदस्यों के नाम आपकी आवाज़.काँम के डाटा बेस में महफूज़ रहेगें..यानी सिर्फ वही राय दे सकेगें।
  14. मिटिंगों में “दस्तरख्वान पर मशवरा” जैसे नायाब तरीके पर अमल किया जा सकता है यानी मीटिंग के दौरान खाने का वक्त होने पर सदस्य टिफिन अपने साथ ही लाया करेगें।
  15. सदस्यता अभियान के तहत लगभग 1 लाख से ज्यादा मुल्क की अहमतरीन शख्सियतों को ईमेल, सोशल मीडिया, वाट्सअप व फोन आदि से दावत दे रहा हूँ और नतीजे 99% पाजिटिव मिल रहे है।
  16. इच्छानुसार सदस्यों व राय देने वालों के नामों की पहचान गुप्त रखी जा सकती है।
  17. विदेश की शिक्षा, रोजगार, शान्ति, भाईचारा व मानवतावादी संगठनों के साथ परस्पर सहयोग करना। संगठन के सारे कार्य देश के कानून व संविधान के अक्षरशः पालन के साथ किये जायेगें।
  18. फाउंडर यानी हमारे बारे में जानने के लिए आपकी आवाज़.काँम के होम में एबाउट अस में देख सकते है।

आपसे हम क्या चाहते हैः

  1. इस मुहिम की शुरुआत मुल्क के 1000 अल्पसंख्यक-दलित बहुल विधानसभाओं में से किसी एक उम्मीदवार को आमतौर से उससे संबंधित 1000 लोगों के मशवरे से तय करके उसे जिताने की कोशिश से कर रहे है और साथ ही उन विधानसभाओं के अच्छे उम्मीदवार की पहचान करके उसे आगामी चुनावों में टिकट दिलानें में मदद करने से किया जा रहा है। इसलिए अपने शहर-स्टेट की ऐसी सीटों की और उस क्षेत्र के अच्छे लोगों की निशानदेही में हमारा सहयोग करिये ताकि ये काम पूरी संजीदगी से किया जा सके।
  2. देशवासियों में से उपरोक्त श्रेणियों के दलित, सेकुलर व दीगर अल्संख्यकों के संजीदा, सेकुलर व सक्रीय व्यक्तियों व संगठनो के जिम्मेदारों से संपर्क करने में सहयोग की उम्मीद करते है। साथ ही मुल्क के 25 करोड़ मुसलमानों में से सिर्फ 1 लाख जिम्मेदार हस्तियों को तलाश करके शामिल करने का नाम ज्यादा मुश्किल नहीं है। बरायेकरम सहयोग दीजिये।
  3. आपकी आवाज़.काम के रेफरेंडम में अपनी पसंदीदा पार्टी का नाम बताने की मेहरबानी करे..ताकि उन पार्टियों की मुसलमानों के हक़ या मुखालिफत में किये गये कामों का ब्योरा भी दे ताकि सभी को रिपोर्ट कार्ड के जरिये किसी को पसंद करने या न करने की बात दलील व सुबूत के साथ बतायी जा सके।
  4. आपकी आवाज़.कांम के मैसेज को सोशल मीडिया, वाटसअप व ईमेल आदि के जरियें ज्यादा से ज्यादा दोस्तो को फारवर्ड करके कारेखैर को कामयाब बनाने से सहयोग दीजियें।

आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा, सक्रियता व निष्पक्षता को देखते हुए आपका नाम “राष्ट्रीय सलाहकार कौंसिल” में शामिल करने का प्रस्ताव है, ताकि आपके ज्ञान, अनुभवों व निःस्वार्थ भाव से समाजसेवा की भावना का सदुपयोग किया जा सके। अतः हमें आशा ही नही विश्वास है कि आप सहमति देकर देश-समाजहित में कार्य करने में अवश्य मार्गदर्शन करेगें- धन्यवाद।

मुत्तहिद हो तो बदल डालो निज़ाम-ए-गुलशन मुन्तशिर हो तो मरो, शोर मचाते क्यों हो ?

Yours,

(S.M. MATLOOB)

Editor-in-Chief and National Convener

I-102, Batla House, Jamia Nagar, New Delhi-25

Mobile: 9213344558/9810565696

Email: editor@aapkiawaz.Com

Website: www.AapKiAwaz.Com.

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Sir/Madam,

On behalf of world renowned news portal www.aapkiawaz.com, we present a brief introduction of ‘social parliament’, a unique and unmatched endeavor to unite and build consensus among the Muslim community in India.

The organization is founded upon the principle drawn from the verse of the Qur’an, اَمْرُهُم شُوْرٰی بَينَهُمْ (the affairs [of the Muslims] are run on mutual consultation (42:38)).

Though consultation is popular among Muslims even today, and its importance and benefits are common knowledge, these dialogues are held on different agendas in small groups resulting in varied decisions. As a result, the desired success has not been achieved.

To overcome this shortcoming, we have planned to formulate a Shu’ra, or council, of one lakh people from across the country so that we are able to build consensus on one decision, just as we worship one God, Allah, follow one prophet, Muhammad SAW, and take guidance from one book, the Holy Qur’an.

Under this plan, solution of issues mainly, social, political, economic, educational, religious, and family in 1000 constituencies across the country will be achieved through mutual consultation besides efforts to spread awareness regarding rights and duties, and to fight crime and corruption.

In order to test its efficiency, a reward of Rs. one lakh was announced before more than 25 lakh people to anyone who could point out any major flaw in the plan but by the Grace of Allah everyone has applauded it.

WHAT MAKES THE ORGANIZATION UNIQUE?

  1. The organization has adopted several unique approaches, for instance, the choice of name ‘social parliament’ where the idea is to do away with the system of annual elections for president and secretary in organizations. Instead, all members are permanent.
  2. To meet the expenses of the organization, the preferred method is voluntary sponsorship and advertisements instead of the infamous methods of donation or membership fee.
  3. To keep members away from any legal hassles, the organization will bear the legal and ethical responsibility of any decisions or actions taken in future.
  4. All members must accept the decision of the majority. www.aapkiawaaz.com reserves the right to expel or replace any member in case he/she remains inactive, insists on imposing his/her opinion, or is found to be involved in corruption, crime, rumour mongering, or any other anti-national, anti-social, or anti-organizational activities.
  5. All decisions of the social parliament will be made on the basis of popular opinion or majority votes.
  6. The Indian social fabric is comprised of five nearly equal parts. a) Muslims b) Dalits c) Communal Hindus d) Secular Hindus, and e) Other minority communities.

Since the general public is concerned with the growing influence of the communal faction in the country, the organization has formulated the principle of ‘Saath Dijiye-Saath Lijiye’ (Give Support, Take Support) among the rest of the groups, i.e., mutual support will be provided in matters mutually agreed upon or causing no harm.

  1. All decisions will be 100% transparent, high-tech, and will be taken keeping in mind rights of all parties within the bounds of law and constitution.
  2. The opinion will be online through website, email, app, SMS, WhatsApp and social media which means any Indian citizen can participate from anywhere in the world and lack of time and age will be no bar for membership.
  3. Any opinion, at any point of time, that aims to make the organisation better and dependable will be welcomed and implemented to the best extent.
  4. The initial membership target is 1 lakh. 10,000 names have been selected from various important organisations of the country, including IICC, Mushawarat, All India Muslim Personal Law Board and other professionals like doctors, advocates, AMU and Jamia Alumni, NGOs, and other institutions. All members are appealed to suggest 10 names so that the organization is comprised of members suggested by you.
  5. Under the basic principle of ‘Common Minimum Program’, the organization will discuss only those issues which are related to 70-90% people of the country or the Muslim community. The opinions of Muslim members will be generally considered because common problems are faced by one community. For instance, there are separate associations for bank employees, railway staff or doctors.
  6. Regarding the opinions received from time to time, decisions will be taken based on the advice of intellectuals from all over the country.
  7. The names of members of the organization will be saved in the database on www.aapkiawaz.com. Only those members will be allowed to give their opinion.
  8. Meetings will be held under such innovative banners as ‘Dastarkhwan par mashwara’, i.e., the members will bring their own food and dine together while discussing the issues.
  9. Under the membership drive, we have invited more than 1 lakh personalities from all over the country through email, social media, WhatsApp and phone etc. The results have been positive in 99% cases.
  10. In case any member requests anonymity, their identity will not disclosed.
  11. The organization aims to work alongside foreign organizations working towards education, employment, peace, brotherhood and humanity.
  12. All the functions of the organization will be carried out within the bounds of the law of the country as well as the constitution.
  13. To know about the founder, you may visit http://www.aapkiawaz.com/about-us/.

HOW YOU MAY HELP?

  1. We have started this campaign with 1000 minority-dalit dominated legislative assemblies. On the basis of opinion of 1000 local people, one candidate will be selected and supported in assembly polls. In addition, the best candidate will be identified in the assemblies and helped to get the ticket in upcoming elections. Therefore, help us identify the seats in your state/city and best candidate of the assembly so that this work can be done sincerely.
  2. We expect cooperation from dalits, and other minorities in above mentioned categories in contacting their sincere, secular and active members and leaders. Since finding 1 lakh important personalities from among 25 crore Muslim population of the country is not very difficult, we request your kind support.
  3. Kindly mention the name of your favorite political party in the referendum at www.aapkiawaz.com so that the party is forced to provide detail of their work in favor of or against the Muslim community. With the help of such a report card, the like or dislike for any party can be stated with reason or proof.
  4. Spread this message from www.aapkiawaz.com on social media, WhatsApp, or email. Forward it to your contacts and help us make it a success.

Given your social standing, activism and fairness, your name is proposed to be included in the National Advisory Council, so that your knowledge, experience and selfless service towards the society can be utilized to the best level.

We not only hope but believe that you will give your consent and guidance in working towards building a better society and nation.

Thanks,

Yours,

(S.M. MATLOOB)

Editor-in-Chief and National Convener

I-102, Batla House, Jamia Nagar, New Delhi-25

Mobile: 9213344558/9810565696

Email: editor@aapkiawaz.Com

Website: www.AapKiAwaz.Com.

राजनीतिक समाधान-सोशल पार्लियामेंट

गैर परो से उड़ सकते है, हद से हद दीवारों तक,

अम्बर तक तो वही उड़ेगें,जिनके अपने पर होंगे।

Respected Sir/Madam
Assalam Alaikum Wa Rahmatullah Wa Barakatuhu,

We are pleased to inform you that world renowned News Portal www.aapkiawaz.com is constituting National Advisory Council which will work on the pattern of Social Parliament towards permanent solution of problems faced by nation, particularly minorities. It will be first and biggest of first of its kind in the country, in which were are including names of at least one lakh prominent personalities from all over India. However, name of prominent personalities from majority community will be included on the basic principle of give & extend Cooperation.

While considering your social status and reputation, we would like to extend offer for your name to be included in the panel of the “National Advisory Council”. The work of the “Social Parliament” will be fully computerized, transparent, within ambit of law and every one will be equal rights. Therefore, you are requested to kindly provide your consent. Thank you- For further enquiry you may contact us on Mobile No. +91 9213344558.

Yours Sincerely,
S.M.Matloob, National Coordinator,
Jamia Nagar-Delhi-25

محترمی و مکرمی
السلام علیکم و رحمۃاللہ وبرکاتہ

-آپکو یہ جان کر یقینن خوشی ہوگی کہ ملک میں اتحاد-اتفاق و تعمیر و ترقی کے لئے پُرامن طریقہ سے کوشش کرنے والی اپنی نوعیت کی پہلی و سب سے بڑی تنظیم ہے,جسکے تحت فی الحال ایک لاکھ معزز و صاحب الرای حضرات پر مبنی ” نیشنل ایڈوائزری کونسل ” کی تشکیل عالمی شہرت یافتہ نیوز پورٹل ” آپکی آواز .کام ” کے زیرِ اہتمام سوشل پارلیامینٹ کے طرز پر دی جا رہی ہے..آپکی سماجی حیثیت و ملّی خدمات کو دیکھتے ہوئے آپکا اسمِ گرامی بھی ” نیشنل ایڈوائزری کونسل ” میں شامل کرنے کے لئے زیرِ غور ہے-اِن شاء اللہ آپکی یہ تنظیم پوری طرح سے کمپیوٹرائز و شفّاف رکھی جائیگی — لہازا ملک و ملت کی تعمیر و ترقی کے پیشِ نظر شروع کی گئ اِس تحریک میں آپکو شامل کئے جانے کی گزارش پر رضامندی سے مطلع فرما کر شکریہ کا موقع عنایت فرمائیں…جزاک اللہ
مزید معلومات کے لئے 09213344558 پر رابطہ کریں
طالبِ خیر– سید محمد مطلوب
( نیشنل کوآرڈینیٹر ) جامعہ نگر اوکھلا نئ دہلی .25

मोहतरमी व मुकर्रमी,
अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बाराकातुहू
आपको ये जानकर यक़ीनन खुशी होगी की मुल्क में इत्तहाद-इत्तिफाक़-तामीर-तरक्की को पुरअमन तरीके से कोशिश करने वाली अपने तरीके की पहली व सबसे बड़ी तंजीम है। जिसके तहत फिलहाल कम से कम 1 लाख मोअज्जिज़ व साहिबे राय हजरात पर मबनी “नेशनल एडवाईज़री कौसिल” की तशकील आलमी शोहरतयाफ्ता न्यूज़ पोर्ट “आपकीआवाज़.कांम” के जेरें एहतमाम सोशल पार्लियामेंट के तर्ज़ पर दी जा रही है।
आपकी समाजी हैसियत व खिदमात को देखते हुए आपका इस्मेगिरामी भी नेशनल एडवाईज़री कौसिल में शामिल करने के लिए ज़ेरे गौर है. ये तंजीम पूरी तरह से कंप्युटराईज़ व ट्रांसपेरेट होगी। लिहाज़ा बरायेकरम मुल्क व मिल्लत की तामीर व तरक्की में शिरकत फरमाने की रज़ामंदी देकर कर शुक्रिया का मोका दें-शुक्रिया।
मजीद जानकारी मोबाईल 09213344558 से हासिल कर सकते है।
तालिबे-खैरः एस.एम.मतलूब, नेशनल कोआर्डिनेटर
जामिया नगर- दिल्ली-25.
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मोहतरमी, भारत दुनियाँ की पहली और मुल्क में मुसलमानों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी,1000 विधानसभाओं में जीताने की सामर्थ, एक अल्लाह-रसूल (सल्ल)-कुरआन-काबा होने के बावजूद के बद से बदतर हालात की प्रमुख वजह सिर्फ सरकारी भेदभाव और “अपनी-अपनी ढ़पली-अपना-अपना राँग” यानी मनमानी में हमारी अकसरियत का मुबतला होना है।

आम सोच ये है कि मुसलमान अनेको मोहलिक बिमारियों मसलक, जात, जेहालत और इलाकाई का शिकार है..अब अहम सवाल ये है कि क्या इस बीमार कौंम को उसके हालात पर छोड़ दिया जाये? दर-दर ठोकर खाने और बेईज्ज़ती की जिंदगी भुगतने के लिए छोड़ दिया जाये या यथासंभव इलाज की कोशिश कराया जायें। जैसे हम अपने मरीज को अगर एक डाक्टर से फायदा नहीं होता है तो उसे मरने के लिए छोड़ने के बजाये दूसरे-तीसरे डाक्टर से इलाज कराते है। यानी जब तक वो जिंदा रहता है तो कोशिश जारी रखते है तो कौंम की तरफ से हम मायूस क्युँ हो गये है?

तरीकेकारः गहन विचार विमर्श के बाद राजनीतिक कामयाबी को यक़ीनी बनाने के लिए दो हिस्सो में विभाजित किया गया हैः 1. कुरआने-पाक की आयत अम्रहुम शूरा बैनहुम,(ऐ इमानवालो) “अपने कामों को आपसी मशवरे से किया करो” (42:38) के आधार पर देशभऱ के सभी ईमानदार, निष्पक्ष और सक्रिय मुसलमानों को “राष्ट्रीय सलाहकार कौसिल” यानी “शूरा” में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। ताकि इनकी राय व सहयोग से आगामी चुनावों में किसी एक उम्मीदवार को आम सहमति से तय करके जिताने की कोशिश की जाये, क्योंकि हमारे वोटो का बँटवारा ही हमारे हारने का बड़ा कारण है। इसके अतिरिक्त 100% वोटर लिस्ट में नाम शामिल करानें, 100% वोटरो को बूध तक पहुँचाने, सीटो के आरक्षण, परिसीमन व अच्छे उम्मीदवारों को टिकट दिलाने आदि जैसे  प्रयास किये जा रहें है।

  • देश दूसरे अल्पसंख्यकों व दलित भाईयों के साथ अपनी पार्टियों व संगठनों की आज़ादी बनाये रखते हुए “सहयोग दे-सहयोग ले” के सिद्धान पर यानी “जहाँ उनका फायदा हो लेकिन हमारा नुक़सान न हो और वैसे ही “जिसमें हमारा फायदा हो, लेकिन उनका नुकसान न हो” के आधार पर यथासंभव इमानदारी के साथ परस्पर सहयोग दिया जाये. इसके लिए महागठबंधन बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जैसे देश व समाज हित में या ज़ुल्म ज्यादती के खिलाफ कोई भी अभियान या प्रयास करता है तो सभी को साथ आना चाहियें और इसी तरह वो हमारे उम्मीदवार की और जहाँ हमारा उम्मीदवार नहीं है वहाँ उनके उम्मीदवार की हम हर संभव सहयोग व सहायता दी जायेगी आदि।

विशेषतायेः 1. बिना किसी भी भेदभाव के 1000 मुस्लिम इसके सदस्य कम से कम  प्रत्येक विधानसभा से बन सकते है, यानी जाति, मसलक़, अक़ीदा जैसी सभी दिवारों को हटाकर सभी को साथ लाया जा रहा है। 2. शूरा में सदर, सेक्रेट्री जैसी चीजें नही है यानी सभी को बराबर का अधिकार होगा, जिसकी वजह से किसी तरह के एखतिलाफात की गुंजाईश न के बराबर रहेगी। 3. सदस्यओं को बहुमत के आधार पर लिए गये सभी फेसलों की मानने, हर संभव सहयोग व सहायता देने की शर्त होगी यानी मनमानी करने का आदी लोगों को दूँध में से मक्खी तरह निकाल फेका गया है। 4. जो फैसला इंसान खुद लेता है..उसको पूरा करने के लिए वो दिलों-जान से पूरा करने की कोशिश करता है, इस मनोवैज्ञानिक तरीके को भी सामने रखा है। 5. शूरा के सभी फैसले आपसी मशवरे से लिए जायेगे..यानी मशवरे की वजह से अल्लाह की तरफ से खैर के भी हक़दार होगें। 6. किसी भी तरह की मनमानी, बेईमानी, खिलाफवर्जी, वादा खिलाफी आदि की शिकायत मिलने  पर संगठन की सदस्या समाप्त करने के प्राविधान की वजह से इंतशार की न के बराबर गुंजाईश रहेगी। 7. सभी फैसले आपकी आवाज़.काँम, सोशल मीडिया, ई-मेल, ऐप व मोबाईल आदि के जरियें मशवरा और बहुमत के आधार पर लिये जायेगें, और उनको मानना व अमली जामा पहँनाने में हर संभव व सहयोग देना सदस्यों की जिम्मेदारी होगी। 8. पार्टी के बजाय शूरा बनाने का फैसला करने की वजह ये है कि वैसे ही आपस में जूतियों में दाल बँट रही है..ऐसे में एक और पार्टी बनाकर आग में तेल डालने जैसा होगा। ऐसे में जो भी उम्मीदवार खड़े है उनमें से एक कंडीनेट पर इत्तफाक करना बनिस्बत आसान भी है।

सदस्य बनियेः यदि आप ईमानदार, निष्पक्ष व सक्रिय है तो सदस्यता शुल्क @ Rs.1/- प्रतिदिन की दर से देकर बन सकते है। फीस को आपकी आवाज़ तक पहुँचाने की जिम्मेदारी स्वम् सदस्य की होगी। आपकी आवाज़.काँम के पास सर्वाधिकार सुरक्षित है। किसी भी तरह की जानकारी या सदस्य बनने के लिए WhatsApp/Missed Call/ IMO @09213344558,Visit @Web/Fb/Twi: AapkiAwaz.Com. या http://www.aapkiawaz.com/contact-us/ पर संपर्क कर सकते है- शुक्रिया।

अधिक जानकारी के लिए 09213344558 पर संपर्क करें-धन्यवाद।