देश में फ़ैल रही इस नफरत की राजनीति का विरोध करे

Mashhood Ahmad
देश में फ़ैल रही इस नफरत की राजनीति का विरोध करे:-

भारत की थल सीमा से सटे 7 अलग अलग देश हैं , अर्थात भारत के 7 पड़ोसी देश हैं , दो अन्य देश भारत की समुद्री सीमा से सटे हैं और उनको यदि जोड़ दिया जाए तो भारत के कुल 9 पड़ोसी देश हुए। पाकिस्तान , चीन , बंगलादेश , भूटान , म्यामार , अफगानिस्तान और नेपाल , और समुद्री सीमा से सटे पड़ोसी हैं मालदीव और श्रीलंका।
भारत की कुल 15107 किमी की थलीय सीमा इन सात पड़ोसियों से मिलती है। जिसमें सबसे अधिक 4097 किमी की सीमा बंगलादेश , 3488 किमी की सीमा चीन और 3322 किमी की सीमा पाकिस्तान से मिलती है। अफगानिस्तान से काश्मीर में मिलने वाली थलीय सीमा की लम्बाई सबसे कम 106 किमी है।

हकीक़त यह है कि भारत का इन 9 देशों में किसी से भी मित्रवत संबंध नहीं है , कुछ हद तक हिन्दू राष्ट्र नेपाल से था तो अब उसके अंदरूनी मामलों में मोदी जी ने हस्तक्षेप करके उसे भी चीन के पाले में भेज दिया , नेपाल की जनता भारत से नफरत करती है। हाँ कुछ देशों से तनावपूर्ण संबंध नहीं हैं परन्तु उन्हें भी मित्र नहीं कहा जा सकता।
इन 9 देशों में 2 देश तो शत्रु ही हैं , चीन और पाकिस्तान। जिनमें चीन सुपर पावर है और पाकिस्तान उसका बेहद करीबी मित्र।

इतिहास को देखें तो भारत को पाकिस्तान से अधिक चीन ने क्षति पहुँचाई है , पाकिस्तान को क्षति तो दरअसल भारत ने पहुँचाई है उसका एक क्षेत्र तोड़कर अलग देश बनाकर।
काश्मीर में पाकिस्तान सीधे सीधे कहीं नहीं है , ना तो वह काश्मीर पर दावा करता है , हाँ वह काश्मीर में आतंकवाद को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करता है और अलगाववादियों को आर्थिक और मनोवैज्ञानिक मदद करता है। पाकिस्तान भारत से हर युद्ध हारा है और एक युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के बहुत बड़े हिस्से को जीता , कब्ज़ा किया , 90 हजार पाकिस्तान सैनिकों को गिरफ्तार किया और फिर छोड़कर वापस आ गया।

चीन के साथ हर युद्ध भारत हारा , चीन ने भारत से उसका बहुत बड़ा हिस्सा छीन लिया , चीन सीधे तौर पर अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं मानता और अपना दावा अरुणाचल प्रदेश पर करता रहा है , उसके सैनिक जहाँ चाहे वहाँ भारत में घुसपैठ करते हैं और कैम्प लगाते हैं , भारत का सुखोई विमान हड़प लेते हैं और हम सन्नाटा खींचे रहते हैं क्युँकि हम चीन से डरते है । चीन भारत के लिए पाकिस्तान से अधिक खतरनाक है , वह भारत के सभी पड़ोसियों का मित्र हो चुका है , जो नेपाल कभी भारत के टुकड़ों पर पलता था वह अब चीन की परोसी थाली में खाना खा रहा है। चीन नेपाल तक में अपने सैनिक उतार चुका है , श्रीलंका की आर्थिक व्यवस्था में दखल दे चुका है। भारत के लगभग सभी पड़ोसी देश चीन के प्रभाव में हैं। पाकिस्तान का भारत के प्रति व्यवहार भी कहीं ना कहीं चीन के इशारे पर ही है।

चीन चारों तरफ से भारत को घेर चुका है और हम पाकिस्तान को अपना सबसे बड़ा शत्रु माने बैठे हैं तो क्युँ ? क्युँकि पाकिस्तान से कटुता और नफरत , भारत की राजनीति में लाभकारी है , पाकिस्तान से नफरत के आधार पर भारत के एक वर्ग विशेष के लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से टारगेट किया जाता है और देश के बहुसंख्यक लोगों को भड़का कर उनमें असुरक्षित होने की भावना पैदा की जाती है और वह उनको वोट देते हैं। भारत के सबसे बड़े दुश्मन चीन के साथ कटुता करके यह राजनैतिक लाभ नहीं मिलने वाला।
भारत में “पाकिस्तान” नाम एक उत्प्रेरक का काम करता है , डराता है और डर कर वोट दिलाता है। पाकिस्तान से जुड़ी हर चीज़ भारत की मीडिया में हाइप कराई जाती है जिससे धार्मिक आधार पर घृणा और उत्तेजना फैले।

क्रिकेट उसका एक प्रमुख माध्यम है , भारत के भाँड चैनल खेल को लेकर उत्तेजना पैदा करते हैं और मैच के पहले इसे भारत-पाकिस्तान का युद्ध का मैदान बना देते हैं , कोई चैनल वाघा बार्डर पर पहुँच कर उत्तेजना फैलाते हैं तो कोई स्टूडियो में और कोई पैनल डिस्कशन में पाकिस्तानी चैनल को शामिल कराकर चीखती चिल्लाती निचले स्तर तक घटिया बहस कराते हैं जिससे उत्तेजना और घृणा फैले और फिर हर भारत-पाकिस्तान मैच से पहले देश के ही नागरिक मुसलमानों से उनका पक्ष जाना जाए कि वह किसके साथ हैं , भारत के साथ या पाकिस्तान के साथ , सोचिएगा तकलीफ कि उस समय मुसलमानों के मन पर क्या गुज़रती होगी जब वह भारत की जीत की आशा लगाए यह सुनते हैं कि तुम तो पाकिस्तान की जीत मना रहे होगे।

दरअसल ऐसा रिफरेन्डम यह काश्मीर में नहीं चाहते , इनको केवल नफरत फैलाने के लिए देश के देशप्रेमी मुसलमानों को पाकिस्तान के साथ जोड़कर चिढ़ाना होता है जिससे 31% लोगों की आत्मा तृप्त हो। यह खतरनाक स्थिति है , चिढ़ाने चिढ़ाने में ही यदि देश का मुसलमान चिढ़ गया तो फिर क्या होगा ?
यह स्थिति अभी की है और यदि युद्ध हुआ तो क्या होगा ? हमारी विरासत वीर अब्दुल हमीद , ब्रिगेडियर उस्मान की है , हमें ना चिढ़ाओ।
पाकिस्तान और चीन को लेकर भारत की अंदरूनी राजनीति ही विदेश नीति तय करती है। नहीं तो चीन भारत के लिए कहीं अधिक बड़ा खतरा है।
######यादव बलवीर सिंह की पोस्ट से।######