मुसलमान आरक्षण के नुकसानात
Written by Editor
26 December 2011
By डॉ वेद प्रताप वैदिक
कांग्रेस ने इस बार गजब का दांव मारा है। यह दांव वैसा ही है, जैसा कि 1971 में इंदिरा जी ने मारा था। गरीबी हटाओ! गरीबी हटी या नहीं, प्रतिपक्ष हट गया। 1967 में लड़खड़ाई कांग्रेस को 352 सीटें मिल गईं| इस बार बाबा रामदेव और अन्ना हजार के आंदोलनों ने सरकार की नींव हिला दी है। उसे इस समय सिर्फ दो ही तारणहार दिखाई पड़ रहे हैं। भोजन-सुरक्षा कानून याने भूख मिटाओ और अल्पसंख्यक आरक्षण याने मुसलमान पटाओ।
भूख मिटाओ पैंतरा काफी अच्छा है बशर्ते कि वह ईमानदारी से लागू हो जाए लेकिन मुसलमान पटाओ पैंतरा कांग्रेस के लिए ही नहीं, देश के लिए और उससे भी ज्यादा मुसलमानों के लिए काफी खतरनाक सिद्घ हो सकता है। कांग्रेस पार्टी बड़े समझदारों की पार्टी है। वह इतनी भोली नहीं कि वह नाम लेकर बताए कि वह मुसलमानों को पटाने पर उतारू है। उसने अपनी चाल पर ‘अल्पसंख्यक’ शब्द का पर्दा डाल दिया है। वह अब ‘अल्पसंख्यकों’ को 4.5 प्रतिशत आरक्षण देगी। अल्पसंख्यकों में सिर्फ उन्हें आरक्षण मिलेगा, जो पिछड़े हैं। इससे कम से कम आठ प्रकार के नुकसान होंगे।
पहला, सच्चे मुसलमान नाराज़ होंगे। वे कहेंगे कि कांग्रेस मुसलमानों पर भी जातिवाद की काफिराना हरकत थोप रही है। यह इस्लाम के मानवीय बराबरी के मूल सिद्घांत के खिलाफ है।
दूसरा, मुसलमानों में जो ऊंची जातियों के लोग हैं, उनके दिल में जलन पैदा होगी याने मुस्लिम समाज में फूट पड़ेगी।
महामहिम मुख्य न्यायाधीश को खुला ख़त
Written by Admin
11 December 2011
महामहिम मुख्य न्यायाधीश महोदय,
भारतीय उच्चतम न्यायालय
नई दिल्ली.
आदरणीय,
आपकी सेवा में समाज में विशेष रूप से भारतीय सांस्कितक संबंध परिषद (आईसीसीआर) व्याप्त भीषण भ्रष्टाचार के विरोध में देशहित में आवाज़ उठाने के कारण अधिकारियों व अदालतों की पक्षपात पूर्ण रवैये तथा एक तरफा कार्यवाही से विक्षुब्ध होने के कारण ये पत्र जनहित में लिख रहा हूँ,क्योंकि इसकी वजह से न सिर्फ हमारा विश्वास प्रशासनिक प्रणाली,सीबीआई और न्यायपालिका पर से उठा है, बल्कि अन्ना हजारे की जनलोक पाल बिल को मिले समर्थन से भी ये बात साबित हो जाती है कि जनता इन भ्रष्ट अधिकारियों व अदालतों से कितना परेशान है, और आम जनता का मौजूदा सिस्टम से मोहभंग हो गया है। अतः इसके अतिरिक्त कोई और समाधान न समझ में आने के कारण, संक्षेप में कुछ कारणों लिख रहा हूँ, अगरचे हमारे पास 100 से अधिक भ्रष्टाचार से संबंधित केसों की जानकारी मय सुबूतों के मौजूद है, लेकिन अगर इसी तरह से प्रशासन व अदालत का रवैया रहा और कोई उचित कार्यवाही नही होती तो इस सूबूतों को सामने न ला पाने की हमारे पास माक़ूल वजह होगी। जिसका वर्णन हम अगले अंक में करेंगे। आपकी सेवा में उचित कार्यवाही का अनुरोध है। सहयोग हेतु धन्यवाद।
पहले भाग में शिकायत कर्ता का सक्षिप्त परिचय पेश रहे है, ताकि ये साबित हो सके कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का दावा ही नही सुबूत भी हैः
PART-1
A brief introduction of the applicant as ready reference:
1. Complainant was an employee of Departments of Ministry of External Affairs, Govt of India and elected President etc of Staff Welfare Association since 1992 continue, worked as dynamic and extremely honest Whistleblower & peace loving and law abiding Employee/Citizen.
अन्ना हजारे बनाम राहुल गांधी
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10 December 2011
नई दिल्ली. अन्ना हजारे ने जंतर मंतर में रविवार को होने वाले अनशन से ठीक पहले शनिवार शाम को किये अपने एक प्रेस कांफ्रेस में कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधा है। अन्ना हजारे संसदीय समिति के लोकपाल प्रस्ताव में ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों, सीबीआई, सिटिजन चार्टर को बाहर रखने के पीछे राहुल गांधी राहुल गांधी के हाथ होने की आशंका जाहिर की।
अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व वाली संसदीय समिति की रिपोर्ट को अन्ना ने देश की जनता से धोखाधड़ी बताया है। उन्होंने कहा कि बिना 'ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों को जब तक लोकपाल के दायरे में अगर नही लाया जाता है, तब तक भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा। सरकार और संसदीय समिति अपना रुख क्यों बदल रहे हैं? इसके पीछे कोई है? इसके पीछे राहुल गांधी है। और कौन हो सकता है, इतना बड़ा फैसला लेने वाला? लेकिन इनकी नीयत साफ नहीं है। इनकी मंशा नहीं है भ्रष्टाचार मिटाने की। हम स्टैंडिंग कमिटी का विरोध करते हैं। अगर 22 तक नहीं होता है तो संसद का सत्र बढ़ाइए। तीन मुद्दों पर रामलीला मैदान में मेरा अनशन तुड़वाने के लिए प्रधानमंत्री ने लिखित दिया था। उन्होंने कहा था कि इन तीन मुद्दों को शामिल करेंगे।' अन्ना ने कहा कि अगर राहुल ऐसी ही नीयत के साथ देश के प्रधानमंत्री बन गए तो क्या होगा?
लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होते ही विपिन नैय्यर नाम का एक शख्स वहां पहुंच गया और उसने हंगामा खड़ा कर दिया। नैय्यर ने यह सवाल पूछा कि जब उन्होंने अन्ना हजारे को दान दिया था तो वह पैसा अरविंद केजरीवाल की संस्था पीसीआरएफ के पास कैसे चला गया?
AN EYE OPENING INTERVIEW
Written by Editor
07 December 2011
New Delhi: Speaking to Karan Thapar, the new Chairman of the Press Council of India Markandey Katju slammed the media saying that he is very disappointed with the way in which the Indian media works. Katju also said that the media is not working for the interest of the people and sometimes divide the AN EYE OPENING INTERVIEW BY KARAN THAPAR WITH PRESS COUNCIL CHIEF MARKANDEY KATJU, ABOUT RESPONSIBILITY OF MEDIA TO BRING HARMONY AMONG PEOPLE INTEAD OF PUBLISHING people of the country.
Karan Thapar: Hello and welcome to Devil’s Advocate. How does the new chairman of the Press Council of India view the media? That’s the key issue I shall discuss with Justice Markandey Katju. Justice Katju recently while discussing with some newspaper and television editors you said, ‘The media have become irresponsible and wayward.’ Then you added, ‘The time has come when some introspection by the Indian media is required.’ Are you disappointed by the media?
Justice Markandey Katju: Very disappointed.
Karan Thapar: And therefore, do you have a low opinion of the media?
Justice Markandey Katju: I have a poor opinion about the media.
Karan Thapar: And you really mean this?
Justice Markandey Katju: I mean this. They should be working for the interest of the people. They are not working for the interest of the people. And sometime they are positively working in an anti-people manner.
डा0 करन सिंह से 100 सवाल-25
Written by Editor
30 September 2011
Confession by the ICCR officer before CBI. "EVEN THERE IS A GENUINE OBJECTION PAYMENT SHOULD BE RELEASED"-DG, ICCR
True copy of the statement of PD (F&A) before the CBI. The postion at present is almost same.

New Delhi. (Aapkiawaz News Service). Statement of Mr. V.Jayaram, S/o Sh. M.R. Venkatesan, aged 44 years, R/o BH-101, Abhimanyu Apartments, Vasundhara Enclave, Delhi-96, working as Asstt. Accounts Officer, MEA, 3rd Floor, Akbar Bhawan, Chanakyapuri, New Delhi, under section 161 Cr.P.C.
I am as above and on being asked, I state that joined ICCR in August 2001 on deputation as Programme Officer (Accounts) and e-appointed as Programme Director (Accounts) in April 2004. I left ICCR in August 2005, My controlling authority is Controller General of Accounts, Ministry of Finance, Lok Nayak Bhawan, Khan Market, New Delhi.
During my posting at ICCR, Delhi in the year 2005, Mr.Rakesh Kumar was DG ICCR and Dr. Madhup Mohta was Director (Publication & Communication). I was the overall Incharge of Accounts Section, at ICCR, Delhi. I am in the pay scale of PB-2 with Grade Pay of Rs.5400/- (Gazetted Officer). Mr. Tapan Kr Das, PO (Account) was assisting me. Mr. Tapan Kr Das was DDO.
माया-माया का मोह छोड़ गरीबों की सुध ले
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24 November 2011
नई दिल्ली-उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की कमान थामकर प्रचार करने निकले राहुल गांधी ने अब तुरुप का वह इक्का चला है जिसे पाने और छिपाकर रखने में उन्होंने पिछले कई साल गुजार दिये हैं। राहुल गांधी ने प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को सलाह दिया है कि अगर जनता के दुख दर्द से रूबरू होना है तो मायावती जी गांव में जाएं, लोगों के बीच बैठे, उनके साथ बैठकर खाना खाएं तब उन्हें पता चलेगा कि प्रदेश में आम आदमी के क्या हालात हैं। खुद राहुल गांधी पिछले कई सालों से यही कर रहे हैं।
राहुल गांधी जो कल तक प्रायोजित यात्राएं करते थे अब उनकी यात्राएं खबर भी बनती हैं और उनके द्वारा दिये गये बयान राजनीतिक तूफान भी पैदा करते हैं। जाहिर है,राहुल को राजनीतिक सफलता मिलने लगी है। इसीलिए आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपने अभियान के तहत बहराइच में एक जनसभा में कहा ‘‘मायावती को मालूम ही नहीं है कि उत्तर प्रदेश में क्या हो रहा है। वह गांव नहीं जातीं, बाहर नहीं निकलती। आपके घर का खाना नहीं खातीं। यही हाल मुलायम सिंह जी का भी है। जब तक आपके नेता आपके घर नहीं जाएंगे, आपका खाना नहीं खाएंगे, आपका पानी नहीं पियेंगे तब तक उनको गरीबी का दर्द समझ नहीं आएगा।’’ राहुल ने कहा ‘‘मायावती गांवों में जाती थीं। आपका दर्द समझती थीं। गुस्सा होती थीं। मगर अब वह बड़ी नेता हो गयी हैं और हेलीकाप्टर से घूमती हैं।’’
कांग्रेस महासचिव ने कहा ‘‘मैंने मुलायम सिंह को भी देखा है कि वह भी कभी आपके बीच जाते थे मगर अब वह समय नहीं रहा। उनमें अब वह गुस्सा नहीं रहा। उन्होंने सत्ता के लिये कल्याण सिंह को गले लगा लिया।’’ उन्होंने कहा ‘‘हम उत्तर प्रदेश को बदलना चाहते हैं। मुझे गुस्सा आता है कि बाकी हिन्दुस्तान आगे बढ़ रहा मगर यूपी पीछे हो रहा है।’’ मायावती को आड़े हाथ लेते हुए राहुल ने कहा ‘‘मायावती जी ने कल शाम कहा कि उन्होंने नरेगा को कभी गैर जरूरी योजना नहीं कहा, लेकिन सच्चाई यह है कि उन्होंने नौ अक्तूबर 2007 को लखनउच्च् की एक रैली में ऐसी बात कही थी।’’
राहुल ने एक सुविधाहीन अस्पताल में हो रहे रंगाई-पोताई कार्य का उदाहरण देते हुए कहा कि उस अस्पताल को इसलिये चमकाया जा रहा था क्योंकि मुख्यमंत्री मायावती का दौरा होना था और उन्हें उस अस्पताल में निरीक्षण के लिये जाना था। इसी से जाहिर होता है कि मायावती जनता से किस कदर कट चुकी हैं। सपा के ‘किसान प्रेम’ पर तल्ख टिप्पणी करते हुए राहुल ने कहा ‘‘भट्टा पारसौल और टप्पल में किसानों पर ज्यादती हुई। इन दोनों जगह कौन गया.....कांग्रेस पार्टी गयी। उस वक्त समाजवादी पार्टी कहां थी।’’
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नई दिल्ली- (अनस) आईसीसीआर में भ्रष्टाचार किस सीमा तक पहुंच चुका है और इनसे जिन लोगों पर साफ-साफ आडिट ने अपनी रिपोर्ट में संगीन आरोप लगायें है, और उन लोगो के खिलाफ कार्यवाही तो दूर, उनको ईनाम दिया जा रहा है। इसका मतलब है आईसीसीआर के अधिकारी किस हद तक गिर चुके है, कि एक ईमानदार कर्मचारी के साथ बिना उचित कारण के सख्त कार्यवाही कर रही है और दूसरी तरफ जिनके खिलाफ सूबूत मौजूद है, उनको ईनाम दिया जा रहा है। आपकी नीचे दी गई रिपोर्ट को पढ़ कर निर्णय करें।








